Mobile Tower Company in India

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Install Mobile Tower on your Roof

Become Carorpati?

(Mobile Tower Company in India)

आप भी अपनी घर या दुकान की छत पर मोबाइल टावर लगवाकर जिंदगी भर फिक्स कमाई पा सकते हैं एवं 50 से 80 लाख एडवास लेकर रातों-रात करोडपति बन सकते हैं। यदि आपके मन के किसी कोने में ऐसी इच्छा छुपी हुई है, तो आपके लिये इस लेख को पढना अत्यधिक आवश्यक है, यहां आपको सभी जवाब मिलगें। Mobile Tower company in India

जैसा कि आप जानते हैं कि हम सभी के दिल में रातों रात अमीर बन जाने की तमन्ना छुपी रहती है, और हमेशा किसी सही-गलत मौके का इन्तजार करती रहती है। लेकिन अधिकांशतः रातों-रात अमीर बनने का तरीका गैरकानूनी ही होता है, क्योंकि कहीं ऐसा खजाना नहीं छिपा है, जिसे आप खोदकर निकाल लेगें। Mobile Tower company in India

हम क्यों जल्द से जल्द अमीर बनना चाहते हैं?

बात दरअसल यह है कि भारत देश की अधिकांश जनता निम्न एवं मध्यम आय वर्ग से संबंध रखती है, ऐसे में इस वर्ग के लोग हमेशा अपनी जरूरतों के लिये संघर्ष करते रहते हैं, वो जितना कमाते हैं, उससे उनकी जरूरतें पूरी नहीं होती, वे निरन्तर आय एवं खर्च के चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं और यहीं से उनके मन में विकृति आनी आरम्भ होती है, जहां वे हिम्मत हारने लगते हैं और हमेशा एक ऐसे रास्ते की तलाश में रहते हैं जहां वे तेजी से धन कमा सके।

ऐसे में आज के कुछ चालाक लोग इस देश की अधिकांश जनता की इसी भावना का फायदा उठाते हैं एवं उन्हें सब्जबाग दिखाकर उनसे रूपये ऐंठते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस विज्ञापन में दिये फोन नम्बरों पर फोन करता है तो वहां बैठे युवक-युवतियां ग्राहक को चिकनी चुपडी बातों में फंसाकर, रजिस्ट्रेशन फीस या मैम्बरशिप फीस या फाइल चार्ज फीस बताकर अपने खातों में रूपये डलवाने के लिये कहते हैं और फिर ये क्रम चलता ही रहता है। यदि आपने तंग आकर पुलिस में शिकायत कर भी दी तो, अधिकांश फोन नम्बर्स फर्जी आई.डी. पर पाये जाते हैं तथा बैंक खाते भी फर्जी आई.डी. पर ही खुलवाये गये होते हैं। ऐसे में कानून एवं तकनीक की खामियों का फायदा उठाकर ये लोग नित नये-नये नामों से विज्ञापन प्रकाशित कराते रहते हैं। Mobile Tower company in India

आप सभी ने अखबारों में ऐसे विज्ञापन अवश्य पढें होगें

  

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इस तरह की फर्जी कम्पनियां चलाने वाले लोगे थोडे-थोडे समय पर अपने नामों और जगहों को बदलते रहते हैं, मगर उनका काम बदसतूर जारी रहता है, कभी किसी नाम से किसी नाम से। हमारा पुलिस प्रशासन भी, अपनी ओर से कोई जिम्मेदारी नहीं निभाता। हम सभी रोज अखबार पढते हैं, और सबकी नजर इन विज्ञापनों पर अवश्य जाती होगी। मगर कोई भी आगे बढकर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता और इसी का परिणाम हजारो लोगों की लुटने के रूप में सामने आता है। लगभग सभी शहरों में ये धंधा खूब फल-फूल रहा है। लेकिन जब तक कोई बडी, सनसनीखेज घटना नहीं हो जाती तब तक सबकी आंखें और कान बन्द रहते हैं।

आपको क्या लगता है कि क्या इन विज्ञापनों में कोई सच्चाई है, मेरा मानना है, जी नहीं। अखबारों में ये विज्ञापन मात्र देश की भोली-भाली जनता को ठगने के लिये प्रकाशित कराये जाते हैं। कहीं कोई ऐसी कम्पनी नहीं बैठी जो लोगों पर पैसा लुटाती हो। हद तो तब हो जाती है जब ये लोग अपने विज्ञापनों में बडी-बडी कम्पनियों के नाम का प्रयोग करते हैं, यहां तक कि रिजर्व बैंक ऑफ इन्डिया और भारत सरकार के नामों का प्रयोग भी इन विज्ञापनदाताओं द्वारा लगातार किया जाता है, और हमारे समाचार पत्र आंख मूंदे सब देखते रहते हैं। Mobile Tower company in India

यहां ये भी समझना जरूरी है कि इस लूट के लिये सिर्फ विज्ञापन प्रकाशित कराने वाले ही लोग ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि काफी हद तक हम सब भी हैं, क्योंकि वो हम ही हैं, जो रातों-रात अमीर बनना चाहते हैं या हमेशा किसी शार्टकट की तलाश में रहते हैं, ताकि कम समय में बिना मेहनत के अमीर बन सके, और इसी बात का कुछ लोग फायदा उठाते हैं।

समाचार पत्रों की भूमिका

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि इस ठगी के खेल में हमारे देश के लोकतन्त्र का एक अन्य मजबूत स्तम्भ भी पूरी तरह जिम्मेदार है एवं उसके द्वारा भी इस लूट को लगातार बढावा दिया जाता है और वो स्तम्भ है हमारे समाचार पत्र, जो मात्र कुछ रूपयों के लालच में इस ओर से अपनी आंखें बंद कर लेते हैं और छोड देते हैं, देश की जनता को उसी के हाल पर।

यहां ये भी जानना जरूरी है कि यदि समाचार पत्र इसमें अपना सार्थक योगदान दें तथा कुछ हजार रूपयों के लिये ऐसे विज्ञापनों को बढावा न देकर ऐसे लोगों का बहिष्कार करें, तो इस देश के हजारों लाखों लोगों का करोडों रूपया लुटने से बच जाये।

आपको नहीं लगता है कि यदि ये झूठे और भ्रामक विज्ञापन समाचारपत्रों में प्रकाशित न किये जाते तो, वे फर्जी लोग एवं कम्पनियां आपको भ्रमित कर ही नहीं पाती और शायद देश की जनता का लाखों-करोडों रूपया लुटने से बच जाता।

पहले तो समाचार पत्रों में क्लासिफाईड वाले पन्नें पर खूब झूठे-सच्चे विज्ञापन प्रकाशित कर अपनी जेब गर्म की जाती है, फिर कहीं किसी पेज पर अपना स्पष्टीकरण भी प्रकाशित कर दिया जाता है कि सुविज्ञ पाठक इस समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापनों पर कोई कार्यवाही करने से पहले पूरी जांच पडताल कर ले, किसी धोखा-धडी होने पर सम्पादक या समाचारपत्र इसके लिये जिम्मेदार नहीं होगा।

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क्या ये देश की जनता के साथ न्याय है?

दोनों हाथों में लडडू

अब तसवीर के दूसरे पहलू पर भी चर्चा करते हैं। पहले तो पैसे लेकर समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराये जाते हैं, फिर जब ये फर्जी कम्पनियां लोगों से लाखों करोडों ठग लेती हैं, तो इसी खबर को खूब नमक-मिर्च लगाकर प्रकाशित किया जाता है और ढीकरा फोडा जाता है, पुलिस और प्रशासन पर। ये न्यायसंगत बात नहीं है, कि अपने छोटे से हित के कारण देश के हजारों लाखों लोगों को ताउम्र परेशानी झेलने हेतु मजबूर किया जाये एवं उनकी खून पसीने की कमाई को लुटवा दिया जाये। Mobile Tower company in India

तो, मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि रातों-रात करोडपति बनने के सपने देखना बन्द करें तथा किसी शार्ट कट के चक्कर में अपना समय और पैसा बरबाद न करें। अपनी सोच के दायरे को बढायें, जो भी काम आप कर रहें हो, उसमें या किसी अन्य काम में संभावनायें तलाशें। अपने कर्म पर भरोसा करें, सही समय का इन्तजार करें। समाचार पत्रों या टीवी में प्रकाशित विज्ञापनों के चक्कर में पडकर अपनी जेब की पूंजी को मत लुटाईये।

क्योंकि किसी ज्ञानी व्यक्ति ने सही कहा है कि जब भी हम एक रूपये में 3 अठन्नी चाहते हैं तो कम से कम 2 अठन्नी खोटी होती हैं, तीनों खोटी निकल जायें तो भी कोई बडी बात नहीं है। Mobile Tower company in India

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